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UPA के खाते में जुड़ा एक और घोटाला: आधार योजना में भी लूट डाला

New Delhi: मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी की UPA सरकार का एक और घोटाला सामने आया है। अब तक कांग्रेस में खाते में आदर्श घोटाला, बोफोर्स घोटाला, कामनवेल्थ घोटाला, कोयला घोटाला, 2G और 3G घोटाला ही शामिल थे, अब उनके खाते में आधार घोटाला भी जुड़ गया है। सूचना के अधिकार से मिली जानकारी के मुताबिक मनमोहन सिंह शासित UPA-2 सरकार ने 13 हजार करोड़ की आधार परियोजना का ठेका विना किसी निविदा जारी किये दे दिया था। यह जानकारी आर टी आई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने UIDAI अधिकारीयों, जनसूचना अधिकारी एमएस बिष्ट और उपनिदेशक सह पीआइओ आर हरीश से सूचना के कानून के तहत मांगी थी। अनिल गलगली ने परियोजना में व्यय की गयी राशि से सम्बंधित सवाल पूछे थे। इस परिजोजना के प्रमुख इन्फोसिस के पूर्व सीईओ नंदन नीलेकनी थे जिन्होंने बाद में बैंगलोर से कांग्रेस के टिकेट पर लोकसभा का चुनाव भी लड़ा था लेकिन बीजेपी प्रत्यासी अनंत कुमार से हार गए थे।

कांग्रेस ने 13 हजार करोड़ का किया घोटाला

खुलासे से पता चला कि परियोजना का ठेका कुल 13663.22 करोड़ रुपये का था जिसे बिना टेंडर निकले और बोली लगाए ही ठेकेदारों को दे दिया गया था। मई 2015 तक 90 करोड़ आधार कार्ड जारी करने से पहले ही 6563 करोड़ रुपये खर्च हो चुके थे। सूचना से मिली जानकारी के मुताबिक इस परियोजना के लिए करीब 25 कंपनियों को विभिन्न जिम्मेदारियां दी गयीं और मनोनयन रिक्वेस्ट फॉर इम्पैनेलमेंट 19 मई 2014 के दिशा निर्देशों के आधार पर किया गया।

निजता के अधिकार का हुआ उल्लंघन

इस खुलासे में सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि निजी कंपनियों के हाथों में देश की 125 करोड़ जनता का व्यक्तिगत डेटा दे दिया गया। इन व्यक्तिगत आंकड़ों का निजी कंपनियों के हाथों में जाना देश के लिए गंभीर चिंता का विषय हो सकता है। यह देश की 125 करोड़ जनता के निजता के अधिकार का सरासर उल्लंघन है। अनिल गलगली ने प्रधानमंत्री से इस विषय में जांच का आदेश देने की अपील की है।

   Over a month ago
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दिया हमारे घर में जलेगा लेकिन रोशनी गरीब के घर में होगी: मोदी

20th September 2015

New Delhi: प्रधानमंत्री मोदी ने आज 12 वीं बार देश की जनता से अपने मन की बात की। इस बार मोदी ने देश की जनता से टेलीफोन और वाइस मैसेज के जरिये सुझाव मांगे थे और उन्हें करीब 55 हजार लोगों के सुझाव मिले। राजस्थान अलवर के रहने वाले पवन आचार्य ने भी मोदी को अपने सुझाव भेजे थे जिसे मोदी ने जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने देश की जनता से साझा किया। मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में पवन कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि उनके सुझाव को देश की जनता को जरूर, सुनना चाहिए और पूरे देश को मानना भी चाहिए।

पढ़िए पवन कुमार का सुझाव

‘मेरा नाम पवन आचार्य है और मै पलवल राजस्थान से बिलांग करता हूँ, मेरा सन्देश प्रधानमंत्री मोदी को ये है कि कृपया आप अपने मन की बात के अगले कार्यक्रम में देश की जनता से इस बात का आह्वाहन करें कि दीवाली पर वे अधिक से अधिक मिटटी के दीयों का उपयोग करें जिससे पर्यावरण का लाभ हो होगा ही, हजारों कुम्हार भाइयों को रोजगार का अवसर भी मिलेगा।

मोदी का पवन आचार्य को जबाब

मोदी ने भी पवन आचार्य के सुझाव को गंभीरता से लेते हुए कहा कि उन्हें विश्वास है कि पवन की तरह उनकी यह भावना हिंदुस्तान के हर होने में जरूर पहुँच जाएगी। मोदी ने कहा कि यह बहुत अच्छा सुझाव है और मिटटी का तो कोई मोल ही नहीं होता है और इसलिए मिटटी के दिए भी अनमोल होते हैं। पर्यावरण की दृष्टि से भी उसकी एक अहमियत है। मोदी ने कहा कि दिया गरीब के घर में बनता है। छोटे छोटे लोग इस काम से अपना पेट भरते हैं।

मोदी का देशवासियों को सुझाव

मोदी ने देशवासियों को सुझाव देते हुए कहा कि आने वाले त्यौहार में अगर हम पवन आचार्य की बात मानकर मिटटी के दिए जलाएंगे तो उनका मतलब है कि ‘दिया हमारे घर में जलेगा लेकिन उनकी रोशनी गरीब के घर में होगी’।

मोदी का सुझाव डाल सकता है चाइना पर असर

अगर देशवासियों ने मोदी और पवन आचार्य के सुझाव को मान लिया तो इस साल चाइना की आर्थिक गति पर असर पड़ सकता है। हर साल हम देखते हैं कि चाइना के सामानों से हमारे देश के बाजार भर जाते हैं। चाइना लड़ियाँ, पटाखे, बिजली के दिए और अन्य सामान इस्तेमाल करने से हमारे देश का हजारों करोड़ रूपया चाइना चला जाता है। इसका मतलब यह होता है कि दीवानी तो हम मनाते हैं लेकिन असल दिवाली चाइना की होती है। चाइना को दिवाली के दिन हजारों करोड़ की कमाई होती है और हमारे गरीब कुम्हारों को नुकसान होता है। अगर मोदी की अपील लोगों ने मान ली तो इस साल कुम्हारों के घर में भी दिए जलेंगे, उनके घर में भी मिठाई आएगी और उनके घरों में भी त्यौहार की रौनक देखने को मिलेगी। इसके साथ ही चाइना की भैंस पानी में चली जाएगी। क्यूंकि चाइना हमारे देश से पैसे कमाकर पाकिस्तान को हथियार भेजता है और उसी हथियार से हमारे सैनिकों पर गोली चलाई जाती है।

   Over a month ago
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गुजरात पुलिस की करतूत, रिकॉर्ड में मुस्लिम बस्ती को लिखा 'मिनी पाकिस्तान'

अहमदाबाद।
गुजरात के अहमदाबाद में पुलिस रिकॉर्ड्स में हिंदू-मुस्लिम बस्तियों को अजीबोगरीब ढग से बांटने का मामला सामना आया है। पुलिस ने एक विवाद में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर में उन्हें पाकिस्तान का रहने वाला बताया है। दरअसल अहमदाबाद के जुहापुरा में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी रहती है, जिसे पाकिस्तान या छोटा पाकिस्तान के नाम से जाना जाता है। वहीं कुछ दूर ही वेजलपुर है जहां हिंदुओं की आबादी ज्यादा होने के कारण हिंदुस्तान नाम दिया गया है। साथ ही इसे बांटने वाली सड़क को वाघा बॉर्डर के नाम से जाना जाता है।
क्या है मामला?
राखियल पुलिस स्टेशन ने लड़ाई के एक मामले में एफआईआर दर्ज की गई जिसमें शामिल होने वाले दो लोगों बाबू अजीजभाई और फैजान अजीजभाई वाटवा को पाकिस्तान का रहने वाला बताया है। असल में अहमदाबाद का यह मिनी पाकिस्तान असल में एक हाउसिंग एन्क्लेव है। यहां पर साबरमती नदी के किनारे चल रही एक योजना के कारण वहां बनी झुग्गियों में रह रहे लगभग 2, 500 मुस्लिम परिवारों को पुर्नस्थापित किया गया है। यहां एक ब्लॉक ऐसा है जहां दोनों समुदायों की आबादी रह रही है उसे 'सद्भावना नगर' का नाम दिया गया है।
mini pakistan
पुलिस चौकी का नाम है 'सद्भावना चौकी'
2 साल पहले पत्थर फेंके जाने की एक घटना के बाद गुजरात के इस तथाकथिक हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच एक पुलिस चौकी की भी स्थापना की गई थी, जिसे 'सद्भावना चौकी' नाम दे दिया गया। जब इस मामले की पोल खुली तो संबंधित पुलिसकर्मी एक-दूसरे को जिम्मेदार बताने लगे।
लोग हो चुके हैं आदी
स्थानीय लोगों से बातचीत करने पर पता चला कि अब वो लोग इन सबके आदी हो चुके हैं। लोगों का कहना है, 'हमें तो इन सबकी आदत हो चुकी है। यहां तक कि ऑटोरिक्शा ड्राइवर भी पूछते हैं कि हम हिंदुस्तान जाना चाहते हैं या फिर पाकिस्तान।'

   Over a month ago
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बाबा रामदेव ने बताया डेंगू का रामबाण इलाज, हमने एक मरीज पर आजमाया..

New Delhi: दिल्ली में डेंगू के कहर से आज एक और बच्चे की मौत होने के साथ मरने वालों की संख्या बढ़कर पंद्रह हो गयी। योगगुरु बाबा रामदेव ने आज दिल्ली सरकार को लताड़ते हुए डेंगू के इलाज का रामबाण इलाज बताया। बाबा रामदेव के मुताबिक उनके बताये इलाज से डेंगू थोड़े ही समय और बेहद कम खर्चे में बिलकुल सही हो सकता है। उन्होंने बताया कि डेंगू से डरने की वजह से लोग और बीमार हो जाते है और आनन फानन में अस्पतालों की तरफ भागते हैं। अस्पतालों में इलाज की उचित व्यवस्था ना होने के कारण मरीज की प्लेटलेट्स और तेजी से गिरने लगती है और उनकी हालत पहले से भी ख़राब हो जाती है। कभी कभी तो देखा गया है कि प्लेटलेट्स चढाने के बाद भी मरीज के शरीर में प्लेटलेट्स और कम हो जाती हैं।

रामदेव ने बताया कि वे डेंगू के इलाज की हवाबाजी नहीं कर रहे हैं बल्कि कई रोगियों को ठीक भी किया है। बाबा रामदेव ने मीडिया से कई ऐसे मरीजों को मिलवाया जिन्हें वे मरने की हालत होने के बाद भी ठीक कर चुके थे। उन्होंने बताया कि मरीजों की संख्या में एंटीजेन नेगेटिव होने के बाद भी हमारे इलाज से वे पूरे ठीक हो गए।

क्या होता है डेंगू

बाबा रामदेव ने बताया कि डेंगू बीमारी में प्लेटलेट्स की संख्या बहुत तेजी से गिरती है। सामान्य इंसान में प्लेटलेट्स की संख्या डेढ़ लाख से पांच लाख तक होती है लेकिन डेंगू की अवस्था में प्लेटलेट्स की संख्या लगातार गिरती रहती है और इलाज ना हो पाने की हालत में इनकी संख्या शून्य तक हो जाती है। खून में प्लेटलेट्स ख़त्म होने बाद मरीज के शरीर के सभी अंग काम करना बंद कर देते हैं और रोगी की मौत हो जाती है।

बाबा रामदेव ने बताया बताया इलाज

1. बाबा रामदेव ने बताया की डेंगू के इलाज में पपीते के पत्ते का जूस सबसे कारगर है। जूस पीने के चंद घंटों बाद ही प्लेटलेट्स की संख्या में बहुत तेजी से बढ़त होती है।

2. पपीते का जूस ना मिले तो एलोवेरा या गिलोय का जूस भी प्लेटलेट्स की संख्या में वृद्धि कर देता है। बुखार और उलटी आने पर अनार का जूस बहुत फायदा करता है।

3. रोगी चाहे तो पपीते के पत्तों का रस, गिलोय का रस या एलोवेरा का रस, तीनों में से कोई भी अजमा सकता है। तीनो ही प्लेटलेट्स बढाने का रामबाण इलाज है। पपीता और एलोवेरा लीवर की समस्या ख़त्म कर देता है। इसके अलावा गिलोय का रस बुखार उतारने में क्रोसिन की गोली से भी तेज काम करता है।

4. बाबा रामदेव ने बताया कि अनार का जूस लीवर के लिए भी फायदेमंद है और इसका जूस पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी सही हो जाती है।

अजमाकर देखा तो पाया एकदम सही

बाबा रामदेव के दावे की सच्चाई जानने के लिए हमने भी आज इस नुस्खे को एक 22 साल के मरीज पर आजमाया है। मरीज के शरीर में प्लेटलेट्स गिरकर 34 हजार तक पहुँच चुकी थी और उसका शरीर की ताकत बिलकुल ख़त्म हो गयी थी। पपीते के पत्तों का रस ढूँढने में मरीज के परिवार वालों को थोडा परेशानी हुई इसलिए उसने पतंजलि स्टोर से एलोवेरा रस खरीदकर पीना शुरू कर दिया और दो बार चार चार ढक्कन दावा पीते ही उसके शरीर में ताकत आने लगी है। एलोवेरा रस पीने के चार घंटे के बाद जब हमने मरीज की खबर ली तो उसने बताया की अब ऐसा लग रहा है कुछ हुआ ही नहीं है। हमने मरीज को कल फिर प्लेटलेट्स चेक कराने को कहा है साथ ही यह भी कहा है कि हो सके तो पपीते के रस या गिलोय के रस का इंतजाम करे।

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लोग इसे कहते हैं छोटा मोदी.....

Ahmedabad: अगर मोदी के दीवाने यह सोचते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के बाद देश को उनके जैसा दूसरा नेता मिलेगा या नहीं तो ऐसे लोगों के लिए खुश खबरी है। मोदी के गुजरात से ही एक दुसरे मोदी का विकास हो रहा है। केवल 6 साल के बच्चे आरव पंकज नायक ने गुजरात में इतनी घूम मचा रखी है कि लोग उसे अभी से छोटा मोदी कहकर बुलाते हैं। यह बच्चा मोदी के जैसे ही भाषण देता है और मोदी के जैसे ही भेष भूसा बनाकर बड़ी बड़ी रैलियों को संबोधित करता है। यही नहीं इस बच्चे पर मोदी की इतनी छाप पड़ी है कि बड़ा होकर मोदी के जैसे बनकर देश का नाम रोशन करना चाहता है। गुजरात में बीजेपी के बड़े बड़े नेता और राज्य सरकार में मंत्री भी रैलियों को संबोधित करने और वोटरों को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए इस बच्चे की मदद लेते हैं। छोटा मोदी हिंदी, अंग्रेजी और गुजराती में बिलकुल मोदी के अंदाज में भाषण देकर लोगों को तालियाँ बजाने के लिए मजबूर कर देता है। यही नहीं इसकी बातों में देशभक्ति का जोश कूट कूट कर भरा होता है।

watch a video here of chotta modi ..



छोटा मोदी उर्ज आरव पंकज नायज के बारे में जानें

आरव पंकज नायक जन्म 12 अगस्त 2009 को अहमदाबाद जिले के मणिनगर में हुआ। यह वही मणिनगर है जहाँ से प्रधानमंत्री मोदी विधायकी का चुनाव लड़ते थे। इनके पिता का नाम पंकज बी नायक है जो रिलायंस दूरसंचार में काम करते हैं। मोदी द्वारा मणिनगर में किये गए विकास कार्यों से आरव केवल तीन साल में ही मोदी का फैन बन गया। आरव ने स्कूलों में मोदी के जैसे भाषण देना शुरू कर दिया जिसे सुनकर लोग आश्चर्यचकित हो जाते। धीरे धीरे इसके भाषण की कला इनके पिता के कानों में पहुंची तो वे भी हैरान हो गए। उन्होंने आरव को सपोर्ट करना शुरू कर दिया और रैलियों में उसे भाषण देने के लिए ले जाने लगे। पंकज नायक छोटा मोदी को देशभक्ति, सदाचार और ईमानदारी का पाठ बचपन से ही पढ़ाते आये हैं। जब उन्होंने मोदी के प्रति उनकी दीवानगी देती तो उन्हें बहुत ख़ुशी हुई। देखते ही देखते आरव को भाषण के लिए धडाधड अवार्ड मिलने लगे। करीब 37 भाषणों में आरव को अबतक 17 अवार्ड मिल चुके हैं। भाषणों के अवाला आरव को 2 अवार्ड स्पोर्ट में भी मिल चुके हैं। आरव के भाषण भी मोदी की तरह ‘भारत माता की जय’ से स्टार्ट होते हैं और उसके भाषण के दौरान श्रोतागण देशभक्ति के जोश से भर उठते हैं। कभी कभी उसके भाषणों पर लोगों को विश्वास करना मुश्किल हो जाता है।

क्या है छोटा मोदी का सपना

छोटा मोदी आरव पंकज नायक हालाँकि अभी मोदी से एक बाद भी नहीं मिला है लेकिन उसका सपना है कि मोदी उससे मिलें और एक बार उसका भाषण अवश्य सुनें। आरव का कहना है कि मोदी ने देश के बहुत अच्छा काम किया है और उसकी इक्षा भी बड़े होकर मोदी जैसा बनने की है। मोदी के प्रति आरव की दीवानगी उस समय शुरू हुई जब वह अपने माता पिता के साथ अहमदाबाद के आस पास के इलाके में घूमने जाता और अपने माता पिता से पूछता ‘कि इतना विकास किसने किया है, सुन्दर झील, अच्छी सड़कें और फ्लाईओवर, पुल, रिवर फ्रंट, BRT आदि सब किसने बनाया है। उसके माता पिता इस सब का श्रेय जब मोदी को देते तो आरव को बहुत ख़ुशी होती और वह कहता कि क्या सबकुछ मोदी ने ही किया है। मै भी बड़ा होकर मोदी के जैसा ही बनूँगा और मोदी के जैसे देश का विकास करूँगा।

छोटा मोदी के पिता का क्या कहना है

आरव के पिता पंकज नायक बताते हैं कि वे भी मोदी के बहुत बड़े फैन हैं और चुनाव के समय में मोदी की सभी स्पीच सुनते थे। उनके पिता ने एक बार आरव के स्कूल में पब्लिक स्पीकिंग दिवस पर आरव के लिए भाषण लिखकर दिया था। एक भाषण देने के बाद आरव ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और खुद ही मोदी के सभी भाषण सुनकर उनके जैसी एक्टिंग करने लगा। देखते ही देखते आरव हजारों लोगों के सामने भाषण देने लगा और बीजेपी विधायक भी उसे रैलियों के लिए बुलाने लगे। उन्होंने बताया कि आरव बिना किसी डर के मंच पर खुलकर भाषण देता है और अपनी स्टाइल से सभी को दीवाना बना देता है। पब्लिक रैलियों के अलावा आरव ने गुजरात यूनिवर्सिटी के कांफ्रेंस हाल में बड़े बड़े अधिकारीयों के सामने भी भाषण दिया है। छोटा मोदी की सभी विडियो यू ट्यूब पर मौजूद हैं। लोग उसका भाषण सुनकर यही बोल रहे हैं कि ‘भगवान ने हमारे लिए एक और मोदी भेज दिया है’। लोग उसे प्यार से छोटा मोदी बोलते हैं।

छोटे मोदी ने सभी क्षेत्रों में किया है कमाल

ऐसा नहीं है कि छोटा मोदी उर्फ आरव पंकज नायक केवल भाषण देने में उस्ताद हैं, वे मीडिया चैनलों पर भी बिंदास होकर बोलते हैं। पिछले हफ्ते ही उन्होंने गुजराती न्यूज चैनल सन्देश पर ‘मोदी की कहानी छोटे मोदी की जुबानी’ कार्यक्रम को होस्ट करके सभी को चौका दिया। जिस शो पर बोलने में बड़े बड़ों के पसीने छूट जाते हैं उस शो पर आरव बिंदास होकर बोल रहे थे। भाषणों के अलावा छोटा मोदी योग और मंत्रोच्चार में भी पारंगत हैं। खेल में भी कई अवार्ड जीत चुके हैं।

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बहुत साल पहले जब कि राजनाथ सिंह UP के CM थे , इन्होंने प्रदेश की आबकारी नीति बदल दी थी । पहले पूरे एक जिले का ठेका छूटता था जिसमे ponty चड्ढा और जवाहिर सेठ जैसे शराब माफिया पूरे प्रदेश के शराब व्यवसाय पे कब्ज़ा कर लेते थे । राजनाथ सिंह ने इस नीति का decentralization कर एक एक दूकान को लाटरी सिस्टम से allot करना शुरू किया । नयी व्यवस्था में कोई भी व्यक्ति किसी भी दूकान के लिए apply कर सकता था । यदि उसे दूकान allot हो जाती तो फिर एक निश्चित licence फी जमा कर उसे सरकारी wholesale shop से दारू खरीद के MRP पे बेचना होता था । राजनाथ सिंह के इस policy decision ने शराब के व्यवसाय से शराब माफिया का एकाधिकार काफी हद तक तोड़ दिया ।
दो वर्ष बाद जब राजनाथ की सरकार चली गयी और मायावती आई तो नयी व्यवस्था रद्द कर पुरानी व्यवस्था पुनः लागू करवाने के लिए शराब syndicate ने एक बहुत बड़ी रकम ( जो शायद कुछ सौ करोड़ थी ) रिश्वत देने के लिए जुटाई ।
नयी व्यवस्था से जहां प्रदेश सरकार को ज़्यादा राजस्व मिलता था वहीं प्रदेश की distillery उद्योग को भी लाभ था । जब distilleries को ये बात मालूम चली तो उन्होंने भी आपस में चन्दा कर के उस से भी बड़ी रकम जुटाई और छोटी बहन से राखी बंधवाई में दे दी । ponty चड्ढा fail हो गए । अंत में वो स्वयं sugar mill और distillery के व्यवसाय में ही कूद पड़े ।
कहने का मतलब ये कि भ्रष्ट सरकारें जब कोई policy decision लेती हैं तो वहीं से भ्रष्टाचार शुरू हो जाता है । इतने ऊंचे level पे शासकीय धांधली करने के लिए कोई सरकार यूँ ही तैयार नहीं हो जाती । सरकार ने शिक्षा मित्रों को समायोजित करना है ये decision लेने से पहले ही शिक्षा मित्रों से पैसे की उगाही शुरू कर दी थी । सपाई गुर्गे पूरे प्रदेश में घूम घूम के शिक्षा मित्रों में माहौल बनाते रहे और वसूली की । एक एक candidate से 3 से 5 लाख तक लिए गए जिसमे से एक मोटी रकम सैफई पहुंची । आप गाँव में किसी से भी बात कर लीजिये । लोग तो साहूकारों के नाम तक बताते हैं जिनसे शिक्षा मित्रों ने 5 से 10 % तक पे पैसा उठा के दिया है । वो लोग अब साहूकारों से बचने के लिए ज़मीनें बेचने के कगार पे हैं ।
शिक्षा मित्रों वाला मुद्दा अगर भाजपा ने ठीक से भुनाया तो ये सपा बसपा के ताबूत की कील बनेगा ..

आपकी राय दीजिये ...?

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